मस्जिद, मदरसे को ज़कात
ज़कात को सीधे किसी मस्जिद, मदरसे या संस्था को उसी तरह नहीं दिया जा सकता जैसे आम सदक़ा दिया जाता है; ज़्यादातर उलमा के मुताबिक़ ज़कात में “तमलीक” यानी उस माल का मालिकाना हक़ किसी योग्य (मुस्तहिक़) इंसान को देना ज़रूरी है, यही वजह है कि ज़कात से सीधे इमारत बनवाना एक बहस-तलब मसला है,…