आज का निसाब अपने-आप

ज़कात कैलकुलेटर 2026 – रुपये में मुकम्मल हिसाब

सोना (तोला या ग्राम), चाँदी, नक़द, बैंक बैलेंस, कमेटी, शेयर और कारोबार का माल एक जगह लिखें और आज के निसाब के मुताबिक़ वाजिब ज़कात फ़ौरन जानें। हिजरी तारीख़ के साथ हौल ट्रैकर, पिछले सालों का अनुमान, PDF रिपोर्ट और WhatsApp शेयर शामिल है।

1. करेंसी, आज का भाव और निसाब
2. नक़द, बैंक और कमेटी
3. सोना और चाँदी

1 तोला = 11.66 ग्राम। नगीनों के बिना सिर्फ़ धातु का वज़न लिखें।

4. निवेश और कारोबार
5. क़र्ज़ और पहले दी गई ज़कात

यह रक़म आपकी वाजिब ज़कात से घटा दी जाएगी।

आपके आँकड़े सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में रहते हैं; हमारे सर्वर पर कुछ नहीं जाता।

पिछले सालों की न दी गई ज़कात (अनुमान)

अगर पिछले सालों की ज़कात रह गई है तो सालों की संख्या और हर साल का अनुमानित शुद्ध माल लिखें।

यह ज़कात कैलकुलेटर कैसे काम करता है?

ज़कात इस्लाम का तीसरा रुक्न है और इसका हिसाब तीन आसान क़दमों में होता है। पहले आपका सारा ज़कात-योग्य माल जोड़ा जाता है: नक़द, बैंक बैलेंस, कमेटी में जमा रक़म, सोने-चाँदी की आज की क़ीमत, शेयर, तिजारत का माल और वह क़र्ज़ जो दूसरों से मिलना है। फिर उसमें से साल भर में चुकाने वाला क़र्ज़ घटाया जाता है। बाक़ी रक़म निसाब के बराबर या ज़्यादा हो तो उसका ढाई प्रतिशत ज़कात है।

भारत के लिए निसाब: हनफ़ी मसलक के मुताबिक़ जब सोना, चाँदी और नक़द मिला-जुला हो तो 52.5 तोला (612.36 ग्राम) चाँदी की क़ीमत निसाब है। यह कैलकुलेटर रोज़ के भाव से निसाब ख़ुद निकालता है; भाव न मिले तो सर्राफ़ा बाज़ार का आज का भाव ख़ुद लिख दें।

किन चीज़ों पर ज़कात नहीं?

हौल: ज़कात का साल कब शुरू होता है?

जिस दिन आपका माल पहली बार निसाब तक पहुँचा, वही आपकी ज़कात की तारीख़ बन जाती है। अगले साल उसी हिजरी तारीख़ को मौजूद माल पर ज़कात वाजिब होती है, चाहे बीच में कम-ज़्यादा होता रहा हो। बहुत से लोग रमज़ान की कोई तारीख़ तय कर लेते हैं ताकि हर साल याद रहे। ऊपर हौल ट्रैकर में तारीख़ सहेजें तो यह पेज आपको अगली ज़कात की हिजरी और ईसवी तारीख़ बताएगा और माल निसाब से नीचे जाए तो साल दोबारा शुरू कर देगा।

दूसरे कैलकुलेटर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में ज़कात का निसाब कितना है?
निसाब के दो पैमाने हैं: साढ़े सात तोला (87.48 ग्राम) सोना या साढ़े बावन तोला (612.36 ग्राम) चाँदी। भारत में रायज हनफ़ी मसलक के मुताबिक़ जब नक़द, सोना और चाँदी मिला-जुला माल हो तो चाँदी के निसाब की क़ीमत पैमाना है, जो आज के भाव के हिसाब से यह कैलकुलेटर ख़ुद बता देता है।
ज़कात का हिसाब कैसे लगाया जाता है?
अपना सारा ज़कात-योग्य माल (नक़द, बैंक बैलेंस, सोने-चाँदी की क़ीमत, तिजारत का माल, शेयर) जोड़ें, उसमें से साल भर में चुकाने वाला क़र्ज़ घटाएँ। बाक़ी रक़म निसाब के बराबर या ज़्यादा हो और उस पर चंद्र वर्ष गुज़र चुका हो तो उसका ढाई प्रतिशत (2.5%) ज़कात है।
ज़कात तनख़्वाह पर देनी है या बचत पर?
ज़कात आमदनी पर टैक्स नहीं है। ज़कात की तारीख़ पर आपके पास जो ज़कात-योग्य माल है उस पर ज़कात वाजिब है, चाहे वह कहीं से आया हो। ख़र्च हो चुकी तनख़्वाह नहीं गिनी जाती; उस तारीख़ को खाते में मौजूद रक़म गिनी जाती है।
हौल क्या है और ज़कात की तारीख़ कैसे तय करें?
हौल यानी एक चंद्र वर्ष। जिस दिन माल पहली बार निसाब तक पहुँचा उस दिन से साल शुरू, और अगले साल उसी हिजरी तारीख़ को मौजूद माल पर ज़कात वाजिब। बीच में माल ख़त्म हो जाए या निसाब से नीचे आ जाए तो साल दोबारा शुरू होता है। इस पेज का हौल ट्रैकर हिजरी और ईसवी दोनों तारीख़ें बताता है।
कई साल ज़कात नहीं दी, अब क्या करें?
हर छूटे साल की ज़कात ग़रीबों का हक़ है जो क़र्ज़ की तरह ज़िम्मे रहती है और उस साल के माल के हिसाब से देनी होगी। सही आँकड़े याद न हों तो ग़ालिब गुमान से अनुमान लगाएँ। इस पेज पर पिछले सालों के अनुमान का अलग हिस्सा है।