नक़द और बैंक बैलेंस पर ज़कात कैलकुलेटर
हाथ का नक़द, बैंक खाते, UPI वॉलेट, कमेटी की जमा क़िस्तें, FD, PPF और विदेशी करेंसी एक जगह लिखें। कैलकुलेटर आज के निसाब से तुलना करके वाजिब ज़कात बताता है और पहले दी गई ज़कात घटा देता है।
नक़द पर ज़कात का निसाब कैसे काम करता है?
नक़द का अपना कोई अलग निसाब नहीं; इसे सोने या चाँदी के निसाब की क़ीमत से नापा जाता है। भारत में रायज हनफ़ी मसलक के मुताबिक़ चाँदी का निसाब (52.5 तोला चाँदी की क़ीमत) पैमाना है क्योंकि यह कम है और इस तरह ज़्यादा लोगों पर ज़कात फ़र्ज़ होकर ग़रीबों तक पहुँचती है। निसाब की रक़म चाँदी के भाव के साथ रोज़ बदलती है, इसलिए यह पेज आज का भाव ख़ुद लेकर निसाब दिखाता है।
FD, PPF और NSC: इनकी मूल रक़म नक़द की तरह ज़कात-योग्य है। जो ब्याज मिलता है वह उलमा के मुताबिक़ सवाब की नीयत के बिना ग़रीबों को दे देना चाहिए। PPF की रक़म पर ज़कात हर साल है, चाहे वह लॉक हो; कुछ उलमा निकालने पर एक साथ देने की इजाज़त देते हैं, मुफ़्ती से पूछ लें।
कौन सी रक़म शामिल होगी?
- घर और जेब का नक़द, सभी बैंक खातों और UPI वॉलेट का बैलेंस।
- कमेटी की जमा की गई क़िस्तें (जब तक मिलें नहीं वे दूसरों पर आपका क़र्ज़ हैं)।
- FD, PPF, NSC और बॉन्ड की मूल रक़म।
- वह क़र्ज़ जो आपने दूसरों को दिया है और मिलने की उम्मीद है।
- घर के ख़र्च के लिए रखी रक़म भी शामिल है अगर साल पूरा होने के दिन मौजूद हो।
दूसरे कैलकुलेटर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नक़द पर ज़कात का निसाब कितना है?
नक़द के लिए हनफ़ी मसलक में चाँदी का निसाब पैमाना है: साढ़े बावन तोला (612.36 ग्राम) चाँदी की आज की क़ीमत। आपका नक़द, बैंक बैलेंस और दूसरा माल मिलकर इस क़ीमत तक पहुँच जाए और चंद्र वर्ष गुज़र जाए तो ढाई प्रतिशत ज़कात फ़र्ज़ है।
कमेटी (चिट फ़ंड) की रक़म पर ज़कात कैसे दें?
कमेटी में जो क़िस्तें आप जमा कर चुके हैं और अभी नहीं मिलीं वे दूसरों पर आपका क़र्ज़ हैं, इसलिए वे आपके माल में गिनी जाएँगी। अगर आप कमेटी उठा चुके हैं तो बाक़ी क़िस्तें आप पर क़र्ज़ हैं और साल भर में चुकाने वाली हद तक घटाई जा सकती हैं।
FD, PPF और बॉन्ड पर ज़कात है?
जी हाँ, इनकी मूल रक़म नक़द की तरह है; उसकी मौजूदा क़ीमत पर ढाई प्रतिशत ज़कात है। ब्याज की रक़म उलमा के मुताबिक़ सवाब की नीयत के बिना ग़रीबों को दे देनी चाहिए।
रमज़ान में पेशगी ज़कात दे दी, फिर देनी होगी?
पेशगी दी गई ज़कात उस साल की ज़कात से घट जाएगी। अपनी ज़कात की तारीख़ पर पूरे माल का हिसाब लगाएँ और पहले दी रक़म ऊपर के ख़ाने में लिखकर घटाएँ; बाक़ी दें।